वनीला कैसे बनता है

आपने अब तक अफवाह सुनी होगी – वेनिला, रास्पबेरी और स्ट्रॉबेरी जैसे कुछ कृत्रिम स्वाद एक बीवर के गुदा स्राव से बने होते हैं। (यदि आपने उस अफवाह को नहीं सुना है, तो हो सकता है कि आपने अपनी कॉफ़ी को थूक दिया हो। क्षमा करें।) तो हम स्पष्ट करने के लिए तैयार हैं कि क्या सच है और क्या नहीं।

एक बीवर के पिछवाड़े से काफी अच्छी खुश्बू आ रही होती है आप यकीन करो या नहीं , जोआन क्रॉफर्ड जो एक वन्य जीव वैज्ञानिक है उन्होंने नेशनल जियोग्राफिक को बताया कि उन्हें बीवर के पिछवाड़े को सूंघना पसंद है उन्होंने ये भी कहा की लोग मुझे कहते है की मैं पागल हु पर मैं उन्हें समझाता हु की वाकई में काफी अच्छी खुसबू आ रही है. अजीब बात है ना

तकनीकी रूप से इसे कस्टोरेयम कहा जाता है, इसमें ब्राउन सलाईम नामका पदार्थ होता है जो बीवर के कैस्टर ग्रंथि से निकलता है। कैस्टर ग्रंथि बीवर के गुदा मार्ग की ग्रंथि के काफी करीब होती है |

Castoreum इतना सुगन्धित होता है की हम पिछले कई वर्षो से इसका उपयोग आइसक्रीम, चिंगम ,केक ,ब्राउनी इत्यादि में कर रहे है | तो चलिए अब जरा डिटेल में इसके बारे में जानते है |

कस्टोरेयम क्या होता है ? What is Castoreum ?

कस्टोरेयम बीवर प्राणी के कैस्टर ग्रंथि से स्त्रावित होता है इसका उपयोग बीवर अपनी निशानी लगाने के लिए, कॉलोनी बनाने के लिए अथवा शिकारियों से बचने के लिए करते है | स्त्रावित होने के समय यह चिपचिपा भूरे रंग का द्रव्य होता है जो पानी और इथनोल में घुलनशील नहीं होता है |

कस्टोरेयम त्वचा अथवा मुँह में जाने पर किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुँचता है इसका मतलब यह जहरीला नहीं होता है | प्राचीनकाल से ही इसका उपयोग दवाईया और इत्र बनाने में हुआ है |

सबसे पहले कस्टोरेयम किसने सुंघा

मनुष्य इतने लम्बे समय से कस्टोरेयम का उपयोग कर रहा है इसलिए अब ये तो पता नहीं चल सका की किस साहसिक व्यक्ति ने सबसे पहले बीवर के पिछवाड़े को सुंघा था परन्तु पहले को लोग इसका इस्तेमाल शिकार को लुभाने के लिए करते थे और रोम वासियो को लगता था की इसका धुआँ गर्भपात का कारन बनता है |

और पिछले कई सालो से इसका उपयोग खाने की चीज़ो में होता रहा है | अब मुझे नहीं लगता इतना सब पढ़कर आप कभी वनीला आइसक्रीम खाओगे | चलो कोई बात नहीं आगे और भी जानकारी है, पहले पूरा पढ़ लो फिर जान लेना की क्या करना है और क्या नहीं |

क्या आज भी वनीला फ्लेवर कस्टोरेयम से ही बनता है

आज कल इसका उपयोग खाने की चीज़ो में काफी कम हो रहा है, इसका ज्यादातर इस्तेमाल इत्र बनाने में किया जा रहा है, वैसे भी इसका उत्पादन बहुत काम होता है और इसे पाना भी कठिन होता है इसलिए कम्पनिया अब फ्लेवर बनाने के लिए दूसरे केमिकल का प्रयोग करती है |

वैसे ये जहरीला नहीं होता और इसे खाया जा सकता है इसलिए कभी कभी कम्पनिया इसका उपयोग करती है लेकिन इसके लिए उन्हें इंग्रिडेंट्स में कस्टोरेयम लिखने की जरुरत नहीं होती वे नेचुरल फ्लेवर लिख के काम चला लेते है |

वैसे भी आज कल कम्पनिया दूसरे पेड़ो का उपयोग फ्लेवर बनाने के लिए करते है इसलिए चिंता करने की ख़ास जरुरत नहीं है | आप सुकून से अपना वनीला या कोई और फ्लेवर खा सकते है |

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By Avnish Singh

Hii. I am Avnish Singh, By education i am a mechanical engineer and and a passionate blogger and freelancer. In Mera Up Bihar I write interesting articles which provides useful information to my readers.

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