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होली खेलते समय रखे इन ख़ास बातो का ध्यान

 होली खेलते समय रखे इन ख़ास बातो का ध्यान | Holi Saftey

होली खेलते समय रखे इन ख़ास बातो का ध्यान
होली खुशियों का त्यौहार है जिसे हमारा देश खूब उत्साह से मनाता है| जब लोग होली खेलना शुरु करते है तब किसी भी बात का ध्यान नहीं देते है और न जाने कितनी गलतिया कर बैठते है जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है|
इसमें कोई संदेह नहीं है कि होली लोकप्रिय त्योहारों में से एक है, लेकिन इस घटना से जुड़े खतरे भी हैं जैसे कि रासायनिक सॉल्वैंट्स के साथ कृत्रिम रंगों, और लेड ऑक्साइड, मरकरी सल्फाइट और कॉपर सल्फेट जैसे विषैले तत्व। ये आपकी आंखों, त्वचा और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंगों में अभ्रक और लीड  के चमकदार कण भी होते हैं, जो त्वचा को परेशान कर सकते हैं और खोपड़ी पर इकट्ठा कर सकते हैं।

१. त्वचा की सुरक्षा कैसे करे?

होली खेलते समय हम विभिन्न प्रकार के रंगों का इस्तेमाल करते है,हमें यह जानकारी नहीं होती है की उस कलर को बनाने में किस केमिकल का इस्तेमाल हुआ है और क्या इसे त्वचा पर लगाया जा सकता है| जब भी आप मार्केट में कलर खरीदने जाते है तब ध्यान दे की आपका खरीदा हुआ रंग त्वचा को नुक्सान पहुचायेगा या नहीं.
होली खेलने से पहले अपनी त्वचा पर कोई भी तैलीय पदार्थ या फिर घी, तेल, अथवा मलाई लगा ले ताकि रंगों आपकी त्वचा से आसानी से निकल जाये|

२. आँखों की सुरक्षा कैसे करे ?

जैसे हमने पहले ही बताया की बाजार में मिलने वाले होली के रंगों में विभिन्न प्रकार के केमिकल होते है और अगर ये आँखों में चले जाये तो जलन होने लगती है , कभी कभी कोई केमिकल कलर आपकी आँखों में अंधापन भी ला सकता है. रंगों में कॉपर सलफेट नाम का केमिकल होता है जो आँखों में एलर्जी,जलन अथवा अंधेपन के लिए जवाब दार होता है| 
केमिकल कलर्स की कीमत प्राकृतिक रंगों के मुकाबले कम होती है इसलिए वे बाज़ार में ज्यादा बिकते है और उन्हें बेचने पर व्यापारियों को ज्यादा मुनाफा भी होता है इसलिए वे इन रंगों को ज्यादा बेचते है|
जहा तक हो सकते तो आप प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करे जो शरीर को कोई नुकसान नही पहुचाते है|
यदि आपकी आँखों में रंग चला जाये तो उसे तुरंत ही साफ़ पानी से धोये और डॉक्टर की सलाह ले|

३. जानवरों को रंग न लगाये 

बहुत सारे लोग जानवरों को भी रंग लगा देते है जो की सबसे ख़राब बात है| लोगो का यह मानना होता है की सूखे रंग से जानवर को कुछ भी नहीं होगा परन्तु यह सोच बिलकुल गलत है,जब आप किसी भी जानवर को रंग लगाते है तब वह रंग उसकी त्वचा को नुक्सान पहुचाता है जिसके कारण उनके बाल भी गिरने लगते है.
जानवर रंग को साफ़ करने के लिए अपनी जीभ से उसे चाटता है जिससे रंग उसके मुह से होते हुए पेट में चला जाता है| रंगों में लीड नाम का केमिकल होता है जो अगर पेट में चला जाये तो आंतो को नुक्सान पहुचाता है और डायरिया भी हो सकता है| याद करे रोज घर पे बनने वाला मेगी उसमे लीड पाए जाने के कारण ही बन हुआ था|
सांस लेते समय रंग जानवरों के फेफड़ो में चला जाता है जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है|
इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है की इस बार की होली या फिर किसी भी त्यौहार में जानवरों पर कृत्रिम रंग न लगाये और सारे देशवासियों तक इस जानकारी को पहुचाये|

४. सिल्वर अथवा गोल्डन कलर 

सिल्वर कलर का इस्तेमाल न करे| सिल्वर रंगों में एल्युमीनियम ब्रोमाइड पाया जाता है जो त्वचा के कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है| ये कलर देखने में तो अच्छे होते है मगर त्वचा को नुक्सान पंहुचा सकते है|

५.बाजार की मिठाइयो का सेवन न करे 

जब भी कोई त्यौहार आता है तब तब मिठाई की दुकानों में भीड़ लग जाती है| जब भी मार्किट में किसी चीज़ की डिमांड ज्यादा हो जाती है तब ज्यादा फायदा कमाने के लिए लोग नकली चीज़े असली बताकर बेचना शुरु कर देते है| मिठाइयो के साथ भी कुछ ऐसा ही है, त्योहारों के समय लोग ज्यादा मिठाई खरीदते है इसलिए दूध की डिमांड बढती है लेकिन दूध की कीमत ज्यादा होने के कारन व्यापारी दूध की बजाय केमिकल का उपयोग करना शुरु कर देते है|
आपने कितने सारे वीडियोस भी देखे होगे जिनमे मिठाई वाले मिलावट करते हुए पकडे गए है| इसलिए जितना हो सके घर के बने पकवान खाए|
इस वर्ष कोरोना वायरस वापस तेजी से फ़ैल रहा है , मार्च महीने में हर रोज ५०,००० जितने केसेस आ रहे है| कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए सारे कदम उठाये और सेफ होली खेले|
यदि आपको यह पोस्ट अच्छी लगी तो इस जानकारी को और लोगो तक पहुचाये. धन्यवाद्